महाराष्ट्र की सोलर एग्री-फीडर स्कीम से 8 लाख किसान को दिन में मुफ्त जैसी बिजली! अब 10,000 MW और बढ़ेगा प्रोजेक्ट

Maharashtra Solar Agri-Feeder Scheme update: महाराष्ट्र सरकार की सोलर एग्री-फीडर स्कीम राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना से अब तक करीब 8 लाख किसानों को सीधा लाभ मिल चुका है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य किसानों को दिन के समय सस्ती और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है ताकि सिंचाई के लिए उन्हें रात में बिजली का इंतजार न करना पड़े।

Maharashtra Solar Agri-Feeder Scheme update

अभी तक राज्य में कई जगहों पर किसानों को रात के समय ही बिजली मिलती थी, जिससे सिंचाई करना मुश्किल और जोखिम भरा होता था। लेकिन इस सोलर एग्री-फीडर स्कीम की वजह से अब दिन में ही बिजली मिलने लगी है, जिससे किसान आसानी से अपने खेतों में सिंचाई कर पा रहे हैं। यही कारण है कि किसान इस योजना को काफी पसंद कर रहे हैं और सरकार भी इसे बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी कर रही है।

4000 MW का काम पूरा, अब 10,000 MW और बढ़ेगा प्रोजेक्ट

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सोलर एग्रीकल्चर फीडर स्कीम के तहत अब तक 4000 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही सरकार ने इस योजना को और मजबूत बनाने के लिए 10,000 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का फैसला किया है।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य के लगभग 75 प्रतिशत किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में सोलर फीडर तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन सरकार का दावा है कि अगले साल तक योजना को राज्य के लगभग सभी हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

इस योजना के तहत सोलर प्लांट से बिजली तैयार कर सीधे कृषि फीडरों को दी जाती है। इससे बिजली वितरण कंपनियों पर भी दबाव कम होता है और किसानों को लगातार बिजली मिलती रहती है।

सोलर पंप और बैटरी स्टोरेज से किसानों को मिलेगा और फायदा

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में “मागेल त्याला सौर कृषी पंप योजना” के तहत सोलर पंप भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। इस योजना में किसानों को सोलर पंप दिए जाते हैं जिससे वे अपनी जमीन की सिंचाई बिना महंगी बिजली या डीजल के कर सकते हैं।

उन्होंने एक महिला किसान का उदाहरण भी दिया, जिसने बताया कि वह अपने खेत की सिंचाई सोलर पंप से करती है और अगर बिजली ज्यादा बनती है तो उसे बैटरी और कैपेसिटर में स्टोर करके रात में घर के कामों के लिए भी इस्तेमाल कर लेती है। इससे किसानों की बिजली लागत लगभग शून्य के करीब पहुंच रही है।

सरकार अब इस योजना के अगले चरण में बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर भी ध्यान दे रही है। बैटरी स्टोरेज से दिन में बनी सोलर बिजली को स्टोर करके रात में भी उपयोग किया जा सकेगा और बिजली ग्रिड के साथ बेहतर तालमेल भी बनेगा।

इस सोलर एग्री-फीडर मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। International Solar Alliance ने इसे एक फ्लैगशिप पहल के रूप में पहचाना है और इस प्रोजेक्ट को 7 से 8 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने भी अन्य राज्यों को इस मॉडल को अपनाने की सलाह दी है।

यह भी पढ़े – 👉 सरकार का बड़ा फैसला! PM-KUSUM से हटकर सस्ती सोलर बिजली खरीदेगा MSEDCL – ₹4700 करोड़ की बचत का दावा

Leave a Comment