सोलर एनर्जी की दुनिया में एक बहुत बड़ी खबर आई है। सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सोलर पैनल बनाया है जो एकदम कांच जैसा दिखता है, यानी पारदर्शी है, लेकिन बिजली भी बनाता है। खास बात यह है कि इस सोलर सेल की मोटाई सिर्फ 10 नैनोमीटर है, जबकि आम सोलर सेल 500 से 700 नैनोमीटर मोटे होते हैं। यह खोज पूरी दुनिया में सोलर एनर्जी के इस्तेमाल का तरीका बदल सकती है।

पेरोवस्काइट सोलर सेल क्या होता है?
पेरोवस्काइट एक खास किस्म का क्रिस्टल मटेरियल है जो सूरज की रोशनी को बिजली में बदल सकता है। पिछले एक दशक में यह मटेरियल सोलर रिसर्च की दुनिया में बहुत तेजी से उभरा है। पारंपरिक सिलिकॉन सोलर पैनल की तुलना में पेरोवस्काइट सेल बनाने में कम लागत आती है, इसे कम तापमान पर बनाया जा सकता है और इसके ऑप्टिकल गुणों को आसानी से बदला जा सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर लगातार काम कर रहे हैं।
NTU की इस खोज में क्या है खास?
NTU के शोधकर्ताओं ने पेरोवस्काइट सोलर सेल को उसकी “अल्टीमेट थिकनेस लिमिट” तक पहुंचाया है। उन्होंने मेथाइलएमोनियम लेड आयोडाइड (MAPbI3) पेरोवस्काइट फिल्म का इस्तेमाल किया और इसे सिर्फ 10 नैनोमीटर तक पतला बनाने में सफलता पाई। तुलना के लिए समझें कि एक इंसान के बाल की मोटाई लगभग 80,000 नैनोमीटर होती है। यानी यह सोलर सेल उससे भी हजारों गुना पतला है।
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब फिल्म इतनी पतली होती है तो क्वांटम कन्फाइनमेंट के कारण उसका बैंडगैप बदल जाता है, जिससे रंग और पारदर्शिता को नियंत्रित किया जा सकता है। XRD और FESEM जैसी उन्नत तकनीकों से जांच करने पर पाया गया कि 10nm की फिल्म भी एकदम चिकनी, एकसमान और स्थिर रहती है।
किस मोटाई में कितनी मिली एफिशिएंसी?
| अवशोषक परत की मोटाई | पावर कन्वर्जन एफिशिएंसी | औसत दृश्य पारदर्शिता |
| 10 nm | 7% | बहुत अधिक |
| 30 nm | 11% | अधिक |
| 60 nm | 12% (LUE: 3.13) | लगभग 41% |
| 500-700 nm (सामान्य) | 20%+ | लगभग शून्य |
60nm मोटाई वाले सेल ने 41% पारदर्शिता के साथ 8% के करीब पावर कन्वर्जन एफिशिएंसी हासिल की, और इसका कलर रेंडरिंग इंडेक्स 79.7 रहा, जो इमारतों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।
इमारतों में कैसे होगा इस्तेमाल?
यह तकनीक सबसे ज्यादा बिल्डिंग-इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (BIPV) यानी इमारतों में सोलर पैनल लगाने के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। अभी तक इमारतों पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल भारी, काले और भद्दे दिखते हैं, जिससे बिल्डिंग की सुंदरता खराब होती है। लेकिन इस नई तकनीक से पारदर्शी सोलर पैनल को खिड़कियों, दरवाजों के शीशे, स्काईलाइट और यहां तक कि दीवारों में भी बिना किसी बदलाव के फिट किया जा सकता है।
वैज्ञानिक Annalisa Bruno के अनुसार यह तकनीक स्केलेबल और डिजाइन फ्लेक्सिबल है, जो इसे इमारतों में बिना दिखे बिजली पैदा करने के लिए आदर्श बनाती है।
दुनिया में पारदर्शी सोलर की बढ़ती मांग
दुनिया भर में पारदर्शी और सेमी-ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल की मांग तेजी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार इमारतें दुनिया की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 40% हिस्सा इस्तेमाल करती हैं। अगर इमारतों की खिड़कियां ही बिजली बनाने लगें तो यह आंकड़ा बड़े पैमाने पर कम किया जा सकता है। यूरोप, अमेरिका और एशिया में कई कंपनियां पहले से इस दिशा में काम कर रही हैं, लेकिन NTU की यह खोज सबसे पतले और पारदर्शी सेल की दिशा में एक नया मानक स्थापित करती है।
आगे की राह
अभी इस तकनीक में कुछ चुनौतियां भी हैं। 10nm वाले सेल में ओपन-सर्किट वोल्टेज कम रहा और कुछ हिस्टेरेसिस भी देखी गई, जिसका मतलब है कि अभी प्रोसेसिंग को और बेहतर करने की जरूरत है। शोधकर्ता Luke White का कहना है कि आगे ऑप्टिकल इंजीनियरिंग से LUE वैल्यू को 5% से ऊपर ले जाया जा सकता है।
भविष्य में इस तकनीक से क्या उम्मीदें हैं?
- स्मार्ट शहरों में हर इमारत की खिड़की एक सोलर पैनल बन सकती है।
- गाड़ियों की विंडशील्ड से भी बिजली बनाना संभव हो सकता है।
- पोर्टेबल और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में इसका उपयोग हो सकता है।
- सोलर एनर्जी को आर्किटेक्चर का हिस्सा बनाया जा सकता है।
यह रिसर्च ACS Energy Letters जर्नल में प्रकाशित हुई है और इसने पूरी दुनिया के सोलर वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। आने वाले समय में जब यह तकनीक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होगी, तो शायद हम जिस खिड़की से बाहर देखेंगे, वही खिड़की हमारे घर को रोशन भी करेगी।
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