भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग और किसानों को दिन में बिजली देने की चुनौती के बीच महाराष्ट्र से एक बड़ा फैसला सामने आया है। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी MSEDCL ने सस्ती सोलर बिजली खरीदने के लिए एक नई रणनीति अपनाने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत अब कंपनी PM-KUSUM योजना से हटकर सीधे प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए सोलर बिजली खरीदेगी। बताया जा रहा है कि इस कदम से करीब ₹4700 करोड़ तक की बचत हो सकती है। इस प्रस्ताव को महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (MERC) से मंजूरी भी मिल चुकी है, जिसके बाद अब राज्य में बड़े स्तर पर सोलर बिजली खरीद की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

2,269 मेगावाट सोलर बिजली खरीदने की तैयारी
MSEDCL ने Mukhyamantri Saur Krushi Vahini Yojana 2.0 के तहत 2,269 मेगावाट सोलर पावर खरीदने की योजना बनाई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराना और राज्य के Renewable Purchase Obligations यानी RPO को पूरा करना है। अगर यह योजना सफल होती है तो हजारों कृषि फीडर सोलर ऊर्जा से चलने लगेंगे और किसानों को सिंचाई के लिए रात में बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
कंपनी का अनुमान है कि प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए खरीदी गई सोलर बिजली की औसत कीमत लगभग ₹2.81 प्रति यूनिट रह सकती है। यह दर मौजूदा कई सोलर प्रोजेक्ट्स की तुलना में काफी कम मानी जा रही है। इसी वजह से कंपनी को आने वाले वर्षों में लगभग ₹4700 करोड़ तक की बचत होने का अनुमान है।
दरअसल पहले इस योजना को PM-KUSUM स्कीम के Component C से जोड़ा गया था, लेकिन अब MSEDCL ने इसे उससे अलग करने का फैसला लिया है। कंपनी का मानना है कि केंद्रीय वित्तीय सहायता यानी Central Financial Assistance (CFA) का लाभ न लेने से भी बोली प्रक्रिया में ज्यादा प्रतिस्पर्धा आएगी और बिजली की कीमत कम निकल सकती है।
टैरिफ कम करने और नए नियम लागू करने का प्रस्ताव
MSEDCL ने अपनी याचिका में दो बड़े बदलावों की मांग की थी। पहला बदलाव यह था कि सोलर टेंडर को PM-KUSUM Component C से अलग किया जाए। दूसरा बदलाव यह था कि सोलर बिजली की अधिकतम टैरिफ सीमा को पहले तय ₹3.10 प्रति यूनिट से घटाकर ₹2.90 प्रति यूनिट कर दिया जाए।
इसके अलावा कंपनी ने Domestic Content Requirement यानी DCR नियमों से भी अस्थायी छूट मांगी थी। इस नियम के तहत आमतौर पर भारतीय सोलर मॉड्यूल और सेल का इस्तेमाल करना जरूरी होता है, लेकिन कंपनी ने कहा कि घरेलू सोलर सेल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण डेवलपर्स को आयातित सोलर सेल इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा जारी मेमोरेंडम का हवाला देते हुए यह भी बताया गया कि 31 अगस्त 2025 तक जमा होने वाली बोलियों में डेवलपर्स को इंपोर्टेड सोलर सेल इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। इससे प्रोजेक्ट की लागत कम होगी और सोलर प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो सकेंगे।
2030 तक 25,000 मेगावाट सोलर क्षमता का लक्ष्य
MSEDCL का यह कदम राज्य के बड़े ऊर्जा प्लान का हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य है कि साल 2030 तक महाराष्ट्र में लगभग 25,258 मेगावाट सोलर क्षमता विकसित की जाए। इससे राज्य की बिजली व्यवस्था अधिक हरित और सस्ती बन सकेगी।
हालांकि आयोग ने यह भी माना कि Mukhyamantri Saur Krushi Vahini Yojana के तहत कई प्रोजेक्ट्स की प्रगति धीमी रही है। पहले इस योजना के तहत 18,835 मेगावाट सोलर क्षमता को मंजूरी दी गई थी, लेकिन कई प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाए। इसके पीछे जमीन के अधिकार, वन मंजूरी, खराब मौसम और चुनावों के दौरान लागू मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट जैसी कई समस्याएं बताई गईं।
इसी कारण कुछ अनुबंध समाप्त हो गए और लगभग 2,832 मेगावाट क्षमता की कमी रह गई। अब नई बोली प्रक्रिया के जरिए इस कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। MERC ने MSEDCL को निर्देश दिया है कि वह प्रोजेक्ट में आने वाली बाधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत करे और जिन डेवलपर्स ने काम में देरी की है उनके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दे।
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